सीएचसी जतुवा टप्पा में राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण के अंतर्गत विश्व रैबीज सप्ताह का आयोजन विश्व रैबीज सप्ताह 2023 के आयोजन का थीम

सतांव/ रायबरेली । सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र – जतुआ टप्पा में राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत विश्व रैबीज सप्ताह का आयोजन किया गया जिसमे अधीक्षक डा० बृजेश कुमार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र – जतुआ टप्पा द्वारा बताया कि रेबीज एक बीमारी है जो कि रेबीज नामक विषाणु से होते हैं यह मुख्य रूप से पशुओं की बीमारी है लेकिन संक्रमित पशुओं द्वारा मनुष्यों में भी हो जाती है. यह विषाणु संक्रमित पशुओं के लार में रहता है. जब कोई पशु मनुष्य को काट लेता है यह विषाणु मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाता है.

मनुष्यों में रेबीज़ के अधिकतर मामले कुत्तों के काटने से होते हैं। उन देशों में जहाँ कुत्तों में आम तौर पर रेबीज़ होते हैं, रेबीज़ के 99% से अधिक मामले कुत्तों के काटने से होते हैं। अमेरिका में, मनुष्यों में रेबीज़ संक्रमण का सबसे आम स्रोत चमगादड़ का काटना है, और 5% से कम मामले कुत्तों से होते हैं।

रैबीज : उपचारकिसी संक्रमित पशु के काटने पर जितनी जल्दी हो सके, हेल्थ केयर विशेषज्ञ से संपर्क करें। घाव को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करें। घाव की सफाई के लिए भी डॉक्टर की सलाह मानें। रैबीज पैदा करने वाले वायरस को रोकने के लिए वैक्सीन (Vaccination) की एक श्रृंखला दी जायेगी।

रैबीज एक घातक वायरस है, जो संक्रमित पशुओं की लार से लोगों में फैलता है। रैबीज वायरस आमतौर पर पशुओं के काटने से फैलता है। यह कुत्ते के अलावा, चमगादड़, लोमड़ी, रैकून जैसे पशुओं के काटने पर भी हो सकता है। भारत जैसे विकासशील देशों में आवारा कुत्तों से लोगों में रैबीज फैलने की सबसे अधिक संभावना होती है।

एक बार जब किसी व्यक्ति में रैबीज के लक्षण दिखाई देने लगते हैं, तो यह बीमारी अक्सर मृत्यु का कारण बनती है। सुरक्षा के लिए रैबीज के टीके लगवा लेने चाहिए।

रैबीज के लक्षण

जैसे कि बुखार आना, सिरदर्द होना, घबराहट या बेचैनी होना, चिंता और व्याकुलता रहना, भ्रम की स्थिति में रहना, खाना निगलने में मुश्किल होना, बहुत अधिक लार निकलना। ये सारे लक्षण रैबीज के हैं। इसके अलावा पानी से डर लगना, पागलपन के लक्षण व अनिद्रा की समस्या रैबीज के लक्षण हो सकते हैं।



   इंट्रामस्कुनलर वैक्सी न की 5 डोज दी जाती हैं. ये डोज काटने के तुरंत बाद, तीसरे, सातवें, 14वें और 28 वें दिन पर दी जाती है. वहीं फिलहाल अस्पततालों में दी जा रही एंटी रेबीज इंट्राडर्मल वैक्सी न की 4 डोज दी जाती हैं. इसकी डोज 0, तीसरे, 7वें दिन और 28 वें दिन पर जाती है.


इस मौके पर  - विजय वर्मा -फार्मासिस्ट, अजय तिवारी -फार्मासिस्ट, आतिब खान बैम, ज्योती मौर्य स्टाफ नर्स, निहारिका लैब टेक्नीसीयन, कुंता चौधरी एनम, रूबी बेगम आपरेटर, पूनम स्टाफ नर्स, विभा स्टाफ नर्स एवं पैरामेडिकल ट्रेनिंग स्टाफ आदि

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