रायबरेली। आंबेडकर के 67वें परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर जनपद के कई स्थानों पर डॉ अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा उनके जीवन संघर्षों पर गोष्ठियां आयोजित की गईं।
सबसे पहले सुबह शहर के हाथी पार्क स्थित डॉ अंबेडकर प्रतिमा स्थल पर रायबरेली जनपद के विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, शैक्षिक और राजनीतिक संगठनों के लोगों ने बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उन्हें नमन वंदन किया। इसी कड़ी में इंटर कॉलेज गौरा में भी एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई जिसमें उनके जीवन संघर्षों को याद किया गया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य मेजर हरिश्चंद्र सिंह ने डॉ अंबेडकर को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि डॉ अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से समता मूलक समाज की आधारशिला रखी थी। भारत का संविधान सभी के अधिकारों का रक्षा कवच है । संविधान में प्रदत्त समस्त मौलिक अधिकार नागरिकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। हमें संविधान का सम्मान करना चाहिए और संविधान के अनुसार ही आचरण करना चाहिए।
शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष एवं मीडिया प्रभारी तथा वरिष्ठ भूगोल प्रवक्ता डॉ सुनील दत्त ने डॉ अंबेडकर के जीवन दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉक्टर अंबेडकर ने न केवल संविधान की रचना की अपितु सामाजिक परिवर्तन के लिए समता सैनिक दाल, राजनीतिक सुधार के लिए रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया, शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी, धार्मिक क्रांति के लिए दि बुद्धिष्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया आदि अनेक संस्थाओं के माध्यम से लोगों को जागरूक किया था।
यहां इस अवसर पर सरोज अनिल कुमार, राजेंद्र प्रताप सिंह, लाल संजय प्रताप सिंह, प्रेमचंद भारती, राजेश कुमार मिश्र, ज्ञान बहादुर, सुधीन्द्र कुमार, राज कुमार, लवलेश कुमार, अशोक कुमार, ब्रजेश कुमार मौर्य आदि शिक्षक उपस्थित रहे।
इसके अलावा अम्बेडकर प्रतिमा स्थल पर विश्व दलित परिषद के अध्यक्ष राजेश कुरील एवं अमर सिंह के नेतृत्व में भी बिचार गोष्ठी आयोजित की गई, जिसका संचालन नीरज रावत ने किया। यहां सामाजिक चिंतक के.पी. राहुल, कांग्रेसी नेता अतुल सिंह, रोहित चौधरी, डॉ सुनील दत्त, राम समुझ लाल धीमान, धम्म दीप, छोटे लाल गौतम, मंगल प्रसाद आदि ने डॉ अंबेडकर के जीवन पर अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर कमल कुमार अहिरवार, मनोज कुमार, राम गोपाल, अनिल कुमार सरोज आदि लोग मौजूद रहे।


