इन्दौर ! विश्व शांति, करुणा, मेत्री, दया, समता, ममता और बंधुत्व की सीख देकर भारत को विश्वगुरु की पहचान दिलाने वाले महाकारुणिक तथागत भगवान गौतम बुद्ध के वंशज होने का हमें गर्व है, लेकिन विडम्बना यह है कि जिस करुणा सागर, विश्वगुरु भगवान गौतम बुद्ध की विचारधारा, उपदेश, संदेश और आदर्श जीवन को समूचा विश्व अपनाने को लालायित है, उस महामानव के वंशज होने के बावजूद हम उनसे कोसो दूर हैं.
यह सारगर्भित उद्बोधन अखिल भारतीय वीरांगना झलकारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश महावर कोली ने परदेशीपुरा स्थित शाक्य मांगलिक भवन में शाक्यवार कोरी समाज समिति द्वारा आयोजित तथागत भगवान गौतम बुद्ध की 2586 वीं जयंती पर आयोजित गरिमामय आयोजन में व्यक्त किए.
अखिल भारतीय कोली समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं भारत पैट्रोलियम कार्पोरेशन बोर्ड के संचालक घनश्याम शेर, मध्यप्रदेश कोली/कोरी समाज के प्रदेश अध्यक्ष अर्जुनसिंह शाक्यवार, शाक्यवार कोरी समाज समिति के अध्यक्ष देवीशंकर कोटिया सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित एवं भगवान बुद्ध के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया. इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष जयंती समारोह में सहभागी बने. समारोह में वरिष्ठ समाजजनों का सम्मान किया गया. संचालन कोषाध्यक्ष दिनेश सोनोटिया एवं आभार हीरालाल सोनोटिया ने माना.
भगवान बुद्ध के विचारों की प्रासंगिता आज भी विश्वपटल पर - घनश्याम शेर
भारत पैट्रोलियम कार्पोरेशन बोर्ड के केन्द्रीय संचालक घनश्याम शेर ने कहा कि 2586 वर्ष पूर्व भारत की भूमि लुम्बनी में शाक्य वंश मे जन्मे और अपना सम्पूर्ण सुख व वैभव त्याग कर सत्य की खोज में निकले राजकुमार सिद्धार्थ ने भारत को विश्वगुरु होने की पहचान दिलाई, ऐसे महामानव की विचार और उनका आदर्श जीवन की प्रासंगिकता आज भी विद्यमान है.
बुद्ध के विचारों को अपने जीवन में उतारना होगा -शाक्यवार
मध्यप्रदेश कोली/कओरी समाज के प्रदेश अध्यक्ष अर्जुनसिंह शाक्यवार ने कहा कि हम अपने आप को भगवान बुद्ध का वंशज होने पर गर्व करते हैं, हमें बुद्ध के आचरण को अपने जीवन में आत्मसात कर समाज को एक नई दिशा दिखाने की आवश्यकता है.
हम तथागत भगवान गौतम बुद्ध के वंशज होकर भी उनसे कोसो दूर हैं - महावर
अखिल भारतीय वीरांगना झलकारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश महावर कोली ने कहा कि हम भगवान बुद्ध का वंशज होने पर गर्व तो महसूस करते हैं, लेकिन विडम्बना यह है, कि जिस महामानव के आदर्श जीवन के सार करुणा, मेत्री, दया, शांति - सदभाव, समता, ममता और बंधुत्व को पूरा विश्व अपना रहा है और बुद्ध की शरण लेने को लालायित है, हम उतने ही उनसे कोसो दूर है, सही मायने में हम पड़ोसी को तो काका कहते नजर आ रहे हैं, लेकिन बाप को बाप नहीं कहते, हम भावनाओं में बहने के बजाय भगवान बुद्ध की शरण में जाकर उनके आदर्श जीवन को अपने जीवन में आत्मसात कर ले तो भगवान बुद्ध की तरह हम भी विश्व पटल पर कोली/कोरी समाज की पहचान बना सकते हैं.
इस अवसर पर महापंचायत के संयोजक कैलाशचंद चौधरी, अध्यक्ष दिनेश वर्मा, साहित्यकार आरसी भस्नेईया, पत्रकार हीरालाल वर्मा, अशोक वर्मा, ईश्वरलाल सनोटिया, इंजिनियर राजेश शाक्यवार आदि ने भी अपने विचार रखे.
अतिथि स्वागत महिला विंग की अध्यक्ष श्रीमती कुसुम कोटिया, भारती शाक्यवार, हीरालाल सनोटिया, मानसिंह सनोटिया, सुरेन्द्र वर्मा, बालकृष्ण शाक्य, राधेश्याम वर्मा, यशोदा सनोटिया, विमला कोटिया आदि ने किया.
रिपोर्ट- देवेन्द्र कोरी

