रायबरेली। तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने सामायिक दिवस के रूप में मनाया। उसके बाद भगवान शांतिनाथ की चंदन पूजा, अक्षत पूजा, फल पूजा, नैवेद्य पूजा, दीपक पूजन, धूप पूजन सहित अष्ट प्रकार की पूजा की गई।
सिविल लाइन स्थित दिगंबर जैन मंदिर में मनाए जा रहे दस दिवसीय पर्युषण पर्व का तीसरा दिन यहां उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया गया। सर्वप्रथम भगवान जिनेंद्र का मंगल जलाभिषेक कर जैन समाज के लोगों ने तीर्थंकर भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की।
जय जिनेन्द्र रायबरेली समाज बहुत ही पुण्य शाली है पर्व के तीसरे दिन आर्जव धर्म पर पूजन अभिषेक श्रावक श्रेष्ठी नवीन परिवार व प्रदीप सपरिवार को मिला।
महापर्व के तीसरे दिन सांगानेर से पधारे शास्त्री अर्पित ने कहा कि जीवन को कैसे जिया जाए जीने की कला का नाम ही जीवन है। एक ऐसी कला जिसमें सौंदर्य हो,शांति हो,सत्य हो,शिवत्व हो- कला मनो भावों की मार्मिक अभिव्यक्ति होती है। हम कला को न जीवन से विलग कर सकते है और न उसको जीवन के शाश्वत मूल्यों से निरपेक्ष ही कर सकते है जीवन बड़ा अमूल्य है।
इसमें संसार का सौंदर्य भरा हुआ है, पर उसका आनंद तभी मिल सकता है जब जीवन जीने की कला को समझें। अध्यात्म जीवन जीने की कला सिखाता है, यह एक दिव्य विधा है। यह मनुष्य को हर दुख, कष्ट, विपत्ति और चिंता से छुटकारा दिलाकर आनंद से सराबोर करता है। भारत भूमि के समृद्ध होने में ही भारत वासियों की भी सुख-शांति है, क्योंकि जिस व्यक्ति के माता-पिता दुखी हों उसका जीवन सुखी कैसे हो सकता है। मां-पिता के आशीर्वाद और उनकी दुआओं से ही जीवन फलता-फूलता है। दुनिया में भारत ही ऐसा देश है, जिसकी संकल्पना माता या मातृभूमि के रूप में की गई।जैन समाज के मीडिया प्रभारी अंकित जैन ने बताया की नित्य नियम पूजा पाठ सोलह कारण पूजा, पंचमेरू पूजा, दशलक्षण पूजा, महावीर स्वामी पूजा, चौबीस तीर्थंकर की पूजा के साथ आरती हुई। शाम को धार्मिक कार्यक्रम हुआ। इस मौके पर हेमेंद्र जैन,संजीव जैन,अशोक जैन,आरके जैन,सनी जैन,नवीन जैन,शुभम जैन,संदीप जैन,रेखा जैन, आशी जैन,रुचिका जैन,रजनी जैन,अनुराधा जैन,रंजना जैन,शकुंतला जैन,पूजा जैन प्रियंका जैन,वसुधा जैन मौजूद रहे।
रिपोर्ट- देवेन्द्र कोरी

