मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि हीट वेव (लू) के कारण बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बीमार व्यक्तियों, निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों एवं फील्ड कार्य करने वाले कर्मचारियों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
लू/गर्मी से बचाव के लिए क्या करें :-
• खाली पेट घर से बाहर न निकलें। नाश्ता या भोजन अवश्य करें।
• बाहर निकलते समय सिर को गीले कपड़े से ढंकें, छाता और धूप का चश्मा पहनें।
• पानी की बोतल हमेशा साथ रखें।
• हल्के रंग के, सूती और पूरी बांह वाले कपड़े पहनें।
• खूब पानी पीकर शरीर को हाइड्रेटेड रखें, ठंडे पानी से स्नान करें।
• ताजा एवं सुपाच्य भोजन करें।
• दोपहर 12 से 3 बजे तक बाहर निकलने से बचें।
• समय-समय पर नींबू पानी, ओआरएस, तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, छाछ, मट्ठा, आम पना
एवं लस्सी का सेवन करें।
• पाचन सुधारने हेतु प्रोबायोटिक्स का प्रयोग करें।
• खुले, हवादार कमरों में रहें एवं घर/कार्यालय में सीधी धूप से बचाव के लिए पर्दों का प्रयोग करें।
• पशुओं को छायादार व ठंडी जगह पर रखें।
क्या न करें :-
• बंद एवं अधिक गर्म स्थानों पर भोजन न बनाएं।
• बाहर निकलते समय तंग, छोटे और गहरे रंग के कपड़े न पहनें।
• तीव्र गर्मी में भारी शारीरिक कार्य न करें।
• शराब, एनर्जी ड्रिंक, अत्यधिक मीठे पेय, चाय, कॉफी और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स से परहेज करें।
• बासी, अधिक प्रोटीन युक्त भोजन का सेवन न करें।
• बच्चों एवं पालतू जानवरों को बंद गाड़ियों में अकेला न छोड़ें।
• नंगे पांव बाहर न निकलें। जिला स्वास्थ्य शिक्षा और सूचना अधिकारी डी एस अस्थाना ने बताया:
हीट स्ट्रोक/लू लगने के लक्षण -
• तेज बुखार (104°F या उससे अधिक),
• बेहोशी या कोमा की स्थिति,
• चक्कर आना, सिरदर्द, उल्टी,
• थकान, कमजोरी, भ्रम की स्थिति,
• गाढ़ा पेशाब, मांसपेशियों और पेट में अकड़न।
ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जनसामान्य से अनुरोध किया है कि गर्मी से संबंधित जोखिमों को गंभीरता से लें और सुरक्षित रहने के लिए आवश्यक उपाय अपनाएं। समय पर सतर्कता बरतकर हीट स्ट्रोक, हीट रैश और हीट क्रैम्प जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।

