स्वाधीनता संग्राम में जनजातीय योगदान को भुलाया नही जा सकता– कृपाशंकर द्विवेदी


 सुल्तानपुर।अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम से संबद्ध सेवा समर्पण संस्थान सुलतानपुर द्वारा आजादी के ७६ वर्ष अमृत काल के अवसर पर देश के स्वाधीनता संग्राम में जनजातीय नायकों के योगदान पर संगोष्ठी का आयोजन हरिहर सिंह प्रसाद महाविद्यालय, भदहरा सुलतानपुर में आयोजित किया गया। जिसके मुख्य अतिथि कृपाशंकर द्विवेदी जी ने वनवासी नायकों के बारे में बताया कि कैसे वीर नायकों ने भारत को आजाद कराने के लिए बढ़ चढ़ लड़ाई लड़ी।
तिलका मांझी और विरसा मुंडा ने अंग्रेजों के नाक में दम कर रखा था। वे तीर धनुष से गोरिल्ला युद्ध किया करते थे। वनवासी नायकों ने जंगल और जमीन के लिए साहूकारों, सामंतों और अंग्रेजों से डट कर मुकाबला किया। उन्होने कहा कि अनेक ऐसे वनवासी नायक हैं कि हम सब जानते ही नहीं है।

        विशिष्ठ अतिथि पावन कुमार पाण्डेय ने कहा कि वनवासी नायकों में न केवल पुरुष वर्ग ही नहीं उनके साथ वनवासी बहनें भी कदम से कदम मिलाकर चल रही थी। झारखण्ड की फूलो और झानों दोनों बहनों ने अपने भाई सिद्ध कान्हु के साथ मिलकर अंग्रेजो का मुकाबला किया। रानी दुर्गावती को हम कैसे भुला सकते है जिसने मुगल शासक अकबर को १५ वर्षों तक परेशान कर रखा थी।मणिपुर कि रानी मां गैदिलन्यु जो कम उम्र में ही अपने चाचा जादोनाग के साथ मिलकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाई, जब अंग्रेजों उनके चाचा जादोनाग को फांसी दे दिया तब रानी मां ने मणिपुर और नागालैंड के नागा समाज का एक सेना तैयार किया और लड़ाई लड़ती रही अन्त में अंग्रेजों ने उनको भी पकड़कर जेल में डाल दिया। रानी मां सन १९३३ से सन १९४७ तक जेल में ही रहीं और जब देश स्वतंत्र हुआ तब भारत सरकार उनको रिहा किया।

आज वनवासी कल्याण आश्रम इस प्रकार संगोष्ठी के माध्यम से तमाम जनजातीय नायकों और वीरांगनाओं का इतिहास समाज के समक्ष प्रस्तुत कर रहा है। जो स्वागत योग्य और बधाई के पात्र हैं कि उनके माध्यम से यह जानकारी हम सब को मिल रही है।

            कार्यक्रम में विभाग संगठन मंत्री सुरेन्द्र कुमार जिला शारीरिक शिक्षण प्रमुख जितेन्द्र कुमार मिश्रा सह हित रक्षा प्रमुख बलराम मिश्र पंकज आदि लोग उपस्थित रहे। संगोष्ठी का संचालन विष्णुनारायण तिवारी एडवोकेट और अध्यक्षता महावियालय की प्राचार्या डॉ ज्योति सिंह ने किया


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