सावित्री बाई फुले के नाम से पुरस्कार व तीन जनवरी को महिला शिक्षा दिवस घोषित करने की मांग


 अमेठी। भारत में स्त्री शिक्षा की जनक क्रांति ज्योति सावित्री बाई फुले की 192वीं जयंती मनाई गई।अमेठी नगर स्थित बाबा साहब डॉ अम्बेडकर की प्रतिमा के समक्ष माल्यार्पण और विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने तीन जनवरी को महिला शिक्षा दिवस घोषित करने की मांग की और सावित्री बाई फुले के नाम से पुरस्कार शुरू करने की मांग की। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं, रिक्शा चालकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक त्रिसरण पंचशील और माता सावित्री बाई फुले और बाबा साहब डॉ अम्बेडकर के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। बौद्ध भिक्षु भंते धम्मदीप ने त्रिसरण पंचशील दिया।जयंती के अवसर पर महात्मा ज्योतिबा फुले दम्पत्ति के जीवन संघर्ष और शिक्षा के आंदोलन पर विस्तार से संवाद हुआ।कवि रामचंद्र सरस ने कविता के माध्यम से सावित्री बाई फुले को नमन किया.-फुले सावित्री मां फातिमा को नमन, ज्ञान की ज्योति से है सजाया चमन,देश गम के अंधेरों में डूबे नहीं, मरते दम तक किया तीरगी ‌का दमन 


 बामसेफ के जिला संयोजक और वीरांगना झलकारी बाई चेतना समिति के संरक्षक संजीव भारती ने सावित्री बाई फुले के जीवन दर्शन और फुले दम्पत्ति के शिक्षा के आंदोलन की विस्तार से जानकारी दी, उन्होंने कहा कि ईंट, पत्थर, कीचड़ की मार सहते हुए माता सावित्री बाई फुले ने गुलाम भारत में अपवंचितों और महिलाओं के लिए शिक्षा की ज्योति जलाई।

सेवानिवृत्त प्रवक्ता पलटूराम ने कहा कि सावित्री बाई फुले के जीवन दर्शन और इतिहास का वर्णन शब्दों में सम्भव नहीं है। महिलाओं को अच्छी शिक्षा देना ही माता सावित्री बाई फुले के लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है।


एडवोकेट पूजा गौतम ने कहा कि सावित्री बाई फुले को आगे बढ़ाकर इतिहास महिला बनाने में महात्मा ज्योतिबा फुले का सबसे बड़ा योगदान है। सभी लोग अपने परिवार की बालिकाओं को अच्छी शिक्षा दें और महिलाओं को सामाजिक कार्यक्रमों में जरूर साथ लेकर जाएं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आंगनबाड़ी कार्यकत्री कर्मपती ने कहा कि बहुजन समाज के लिए शिक्षा की देवी माता सावित्री बाई फुले हैं, उनके इतिहास को घर‌-,घर पहुंचाना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने ही महिलाओं के लिए शिक्षा के द्वार खोले। विचार गोष्ठी को चेतना समिति के अध्यक्ष संजय कुमार कोरी,रामफल फौजी, डॉ उदयराज राव, रामचंद्र, गुरु प्रसाद, राजेश कोरी, रामशंकर , एडवोकेट सोनाली, शिक्षक विकास कुमार,प्रमोद कुमार एडवोकेट, त्रिभुवन दत्त, शारदा देवी, लालती देवी,सोना देवी, कलावती,बच्चा राम वर्मा, कलावती, ललित कुमार, इश्तियाक अहमद, हरिश्चंद्र कोरी, आशीष कुमार ,हरिभजन बौद्ध , कमलेश कुमार ,जिया लाल बौद्ध, नीरज बौद्ध आदि ने संबोधित किया कल्पनाथ यादव,,राम संजीवन, विश्राम सुरजीत यादव ,राजू बौद्ध आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन संजय कुमार कोरी और राम चंद्र ने किया।




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