जांच के नाम पर खेला गया बड़ा खेल, जीरो टॉलरेंस नीति हुई धराशाही


 रायबरेली ।। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जीरो बैलेंस नीति के तहत काम करने के लाख आदेश दे रहे हो लेकिन अधिकारी है कि भ्रष्टाचार में इस कदर लिप्त है कि उनके ऊपर इन इन आदेशों का कोई असर होता नहीं दिख रहा जांच के नाम पर चला बड़ा खेल । मामला रायबरेली के लालगंज तहसील के ग्राम सभा नरसिंहपुर का है जहां पर प्रधान के द्वारा तालाब की खुदाई जेसीबी के द्वारा कराई जा रही थी जिसकी शिकायत गांव के ही निवासी रणजीत सिंह ने तहसील प्रशासन से की जिस पर खंड विकास अधिकारी लालगंज ने अपनी रिपोर्ट प्रेषित करते हुए बताया कि शिकायतकर्ता की शिकायत पर जांच की गई और जांच के उपरांत तथ्य सही पाए गए लेकिन कार्यवाही के नाम पर जांच का झुनझुना जरूर दिया गया । अब यहां से शुरू होता है जांच का खेल ! मामला जिला अधिकारी हर्षिता माथुर के समक्ष आया इसके बाद जांच दी गई मुख्य विकास अधिकारी को मुख्य विकास अधिकारी ने जांच पर कार्यवाही करने के लिए दोबारा से वीडियो को और मनरेगा डीसी से जांच करने के लिए कहा गया इस जांच की समय सीमा के दौरान प्रधान ने जुगाड़ नीति के तहत अधिकारियों को ऐसा सेट किया कि इस अधिकारी के द्वारा जिस पर रिपोर्ट शिकायतकर्ता के आधार पर सही पाई गई थी अब दूसरी रिपोर्ट में खंड विकास अधिकारी ने जांच में रोड का निर्माण होना बताया यह सब ऐसे ही नहीं हुआ इसमें चला सांठ - गांठ और लेन-देन का खेल !फिलहाल पूरे मामले पर आज शिकायतकर्ता फिर जिलाधिकारी से मिलकर उनको पूरे मामले से अवगत कराया मामले पर फिर जिला अधिकारी ने जांच का झुनझुना बजाने के लिए शिकायतकर्ता को दिया है और कहा है की कार्यवाही होगी । 

अगर ऐसे ही कार्रवाई होगी तो भ्रष्टाचार मुक्त भारत कैसे बन पाएगा ! जिला अधिकारी महोदय एक और जहां जांच में प्रधान को दोषी पाया जाता है वहीं जांच के नाम पर खेले गए खेल के बाद अब दूसरी जांच के रिपोर्ट रोड निर्माण बताई जा रही है ।फिलहाल इस पर भी कैमरे पर जिलाधिकारी ने कुछ नहीं बोला है और अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी से रिपोर्ट जरूर तलब करने की बात कही है कि आखिर जब शिकायतकर्ता ने प्रार्थना पत्र दिया था उसी दौरान क्या वहां रोड निर्माण कराया जा रहा था ? फिलहाल जेसीबी के द्वारा तालाब की खुदाई का कार्य किया गया है 

जिस पर मनरेगा डीसी ने कैमरे पर बयान देते हुए बताया था कि इस पर कार्यवाही करते हुए खंड विकास अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट पेश की है कार्यवाही की जाएगी। फिर इस जांच का घुमावदार चक्कर लगाने को शिकायतकर्ता को क्यों मजबूर किया गया ? जबकि न्यूज़ चैनल पर प्रमुखता से खबर भी प्रकाशित हुई जिसका अधिकारियों ने संज्ञान भी लिया लेकिन उसके बाद भी अब पूरा खेल जांच के नाम पर खेला जा रहा है !

 फिलहाल अब देखना यह होगा कि यह जांच का झुनझुना कब तक बजाने के लिए दिया जाएगा या फिर इस पर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ संज्ञान लेकर कोई कार्यवाही करते हैं या नहीं क्योंकि अब शिकायतकर्ता मुख्यमंत्री से मिलने की बात कर न्याय की गुहार लगाने की बात जरूर कर रहा है ?

रिपोर्ट- अनिल कुमार

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