डीह /रायबरेली।शनिवार को टेकारी सहन में संत शिरोमणि सद्गुरु कबीर जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। भजन ,संवाद सभा और विचार गोष्ठी के साथ भंडारे का भी आयोजन हुआ।जन्मोत्सव में संत कबीर के दर्शन और शिक्षाओं के साथ तथागत बुद्ध , बाबा साहब डॉ अम्बेडकर के दर्शन और भारतीय संविधान की व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
समारोह को लखनऊ विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर डॉ रविकांत चंदन ने मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित किया। उन्होंने प्रदेश स्तर पर आयोजित डॉ अम्बेडकर सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में जूनियर संवर्ग में तीसरा स्थान प्राप्त अंशी मौर्य को नकद पुरस्कार और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने कहा कि कबीर वह फक्कड़ कवि और समाज सुधारक हैं, जिन्होंने अवतारवाद को खंडित किया। कबीर के राम अयोध्या के राम नहीं, कबीर ऐसे महान संत हैं , जिनके आध्यात्मिक दर्शन पर दुनिया में अभी भी शोध चल रहे हैं। कबीर की शिक्षाओं को अपनाने से ही नये भारत की तकदीर बदल सकती है।
प्रोफेसर रविकांत चंदन ने डॉ अम्बेडकर को कबीर का सबसे योग्य शिष्य बताया और कहा कि डॉ अम्बेडकर का बचपन कबीर की शिक्षाओं को सुनकर आगे बढ़ा है। कबीर के जीवन दर्शन के साथ साजिश हुई। उन्हें कलंकित करने के लिए उनके जन्म को ग़लत तरीके से प्रस्तुत और परिभाषित किया गया है। जातिवादी व्यवस्था और धार्मिक अन्धविश्वास को पोषित करने वाली ताकतों ने कबीर को वैष्णव और बुद्ध को विष्णु का अवतार बना दिया है,इसे अम्बेडकरवादी बहुजन समाज कभी स्वीकार नहीं कर सकता है।
डा. रविकांत चंदन ने कबीर के दर्शन से अधिक विचार डा. अम्बेडकर के जीवन दर्शन और भारतीय संविधान पर व्यक्त किए और कहा कि भारतीय संविधान बदलने की कोशिश करने वाली ताकतों को अमेठी और रायबरेली की जनता ने मुंहतोड़ जवाब दिया है। राम के नाम पर राजनीति की दुकान चला रहे लोगों को राम जी ने सजा दे दी है अवध और अयोध्या के राजा अब और कोई नहीं शूद्र समाज में पैदा हुए पासी अवधेश प्रसाद हैं।
बौद्ध भिक्षु भंते धम्मपाल जी की ओर से सामूहिक त्रिसरण पंचशील के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। सत् साहब की है वानी, छोड़ो झूठ, कपट, बेईमानी। क्योंकि छोड़ कर दुनिया है जाना कि तेरा यहां कोई नहीं --भजन प्रस्तुत करते हुए भजनी और गीतकार पवन तूफानी ने कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। रामफेर अनुरागी ने सतगुरु तुम्हारे प्यार ने जीना सिखा दिया -सुंदर भजन प्रस्तुत किया।
प्रमुख वक्ता के रूप में कमलेश कुमार यादव ने कबीर की वाणी और धर्मदास की ओर से संकलित उनकी रचनाओं का उल्लेख किया और वासनाओं पर विजय पाकर जीवन को धन्य बनाने का संदेश दिया। भारत में इस वर्ष कबीर के सत्य की जीत हुई है। कुर्सी के लिए राम राम की रट लगाने वालों को राम ने ऐसी पटखनी दी कि दुनिया में चर्चा हो रही है।
सेवा निवृत्त डिप्टी कमिश्नर शिव प्रसाद वर्मा ने कहा कि संत कबीर अवतारी पुरुष नही थे। पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ, पंडित हुआ न कोय, ढाई अक्षर प्रेम का पढै सो पंडित होय।-का उल्लेख किया और कहा कि कबीर ने दुनिया को प्रेम और मानवता का पाठ पढ़ाया।
सद्गुरु कबीर जन्मोत्सव समिति आयोजन समिति की ओर से संयोजक राम अहोरे कोरी, सहसंयोजक रामपाल कोरी, राम केवल, विंधादीन पासी, सुरेश कोरी ने अतिथियों का स्वागत सम्मान किया। अतिथियों के माल्यार्पण एवं साल्यार्पण के अवसर पर श्रीराम वर्मा, राम केवल निर्मल, गंगाराम और छोटेलाल उपस्थित रहे।
जन्मोत्सव समारोह का उद्घाटन विधायक अशोक कुमार कोरी ने किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में संत शिरोमणि कबीर साहेब जैसा महान संत और समाज सुधारक दुनिया में कोई नहीं हुआ।
विशिष्ट अतिथि और वरिष्ठ पत्रकार संजीव भारती ने कहा कि संत कबीर ने हिन्दू और मुसलमान दोनों को धार्मिक कट्टरवाद के मामले में फटकार लगाई और सबके मंगल और कल्याण की बात की। कबीर की वाणी, बुद्ध की वाणी और रविदास की वाणी में समानता का उल्लेख किया और कहा कि सभी संतों ने तर्कशील समाज और शुद्ध चिंतन का संदेश दिया है।
राठ हमीर पुर के पूर्व विधायक गयादीन अनुरागी ने कहा कि संत शिरोमणि कबीर ने सत्य मार्ग और मानव धर्म का संदेश दिया है। के. जी. एम.यू. लखनऊ के दंतरोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. हरीराम ने कहा कि धर्मान्धता और पाखंड वाद के विरुद्ध कबीर ने जीवन भर संघर्ष किया।
क्षेत्रीय ग्राम विकास संस्थान रायबरेली के प्राचार्य रघुराज जी ने कहा कि कबीर नाम नहीं एक विचार धारा है, जिस पर दुनिया भर में लोग रिसर्च करते हैं। वरिष्ठ सामाजिक चिंतक और लेखक के पी राहुल ने कहा कि जो कुछ बुद्ध ने पालि, सुकरात ने ग्रीक में कहा वही संत कबीर ने अवधी में कहा। बुद्ध ने कबीर के दर्शन को परिभाषित किया है। कबीर की वाणी कहै कबीर मैं सो गुरु पाया, जाका नाम विवेकू रे---का उल्लेख किया और कहा कि कबीर के साथ धोखाधड़ी हुई है। वे न तो विधवा ब्राह्मणी से पैदा हुए , न ही उनके गुरु रामानंद थे। कबीर की वाणी को आगे बढ़ाने और बौद्ध धर्म को बचाने में सिक्ख धर्म का महान योगदान है। भारतीय संविधान के सामने सारे ग्रन्थ शून्य हैं। उन्होंने कहा कि संतों को जातियों के खांचे में नहीं बांधा जाना चाहिए। लोक तंत्र और जातियां एक दूसरे के विरोधी हैं। के पी राहुल ने कहा कि भारत में अभी भी योग्यता नही जाति की जांच होती है।जाति मिटाओ सामाजिक आंदोलन देश की जरूरत है।
सभा को बसपा के पूर्व जिला अध्यक्ष सुरेश कमल, शाक्य एस एन मौर्य , रामनाथ भारती, डॉ शिव बहादुर आदि ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन सामाजिक चिंतक डॉ. सुनील दत्त ने किया। समारोह की अध्यक्षता वीरांगना झलकारी बाई कल्याण विकास परिषद के अध्यक्ष राम सजीवन धीमान ने किया। उन्होंने कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
कार्यक्रम के समापन के अवसर पर नगर पालिका परिषद रायबरेली के अध्यक्ष शत्रुघ्न सोनकर ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सीजेएम चित्रकूट सतीश कुमार मगन, इन्द्र पाल गौतम, राम चंद्र सरस , जगदीश शर्मा, राजेंद्र कुमार, तुलसीराम, सूर्यकांत कोविद, इंजीनियर एस. के. आर्या, अवकाश प्राप्त सूबेदार राम फल फौजी, राजेश अकेला, संजय कुमार, रामचंद्र गुरुजी,मो इश्तियाक, डा. नन्हे लाल, बौद्धाचार्य राम प्रताप, ललित कुमार, श्याम लाल, श्याम कुमार, त्रिभुवन दत्त, राधेश्याम, रामप्रसाद चौधरी, प्रमोद कुमार बौद्ध, अनिल कुमार सरोज, मुन्ना लाल, अमर सिंह, कमल कुमार बौद्ध, राजेंद्र कुमार, रामसमुझ लाल धीमान, डॉ भीमराव अंबेडकर बुद्ध विहार समिति रायबरेली के राम प्रसाद बौद्ध, चंद्रशेखर बौद्ध, मनीष कुमार, श्यामलाल, गुप्तार वर्मा, राजेंद्र कुमार बौद्ध, विमल किशोर सबरा, अवकाश प्राप्त सूबेदार हरिप्रसाद शास्त्री, आर.डी. कुरील, प्रेमलाल कुरील, छोटेलाल गौतम, हरिलाल उन्नाव, अशोक सावंत, राज गौतम, डॉ राधेश्याम निर्मल, डॉ देवेंद्र भारती, दिलीप कोरी कोटेदार, मोनू कोरी, इंजीनियर दिनेश रतन बौद्ध, राजेश राज, राम भवन, सुरजीत कुमार, सुनीता कोरी, विकास कुमार, रामस्वरूप मौर्य, डी.डी. कुशवाहा, बिंदा प्रसाद मौर्य, छेदीलाल, श्रम मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार के पी. ए. हरिश्चंद्र, डॉ. अनिल कुमार बौद्ध जगदीशपुर, इंजीनियर वंश बहादुर यादव, शिव कुमार आदि मौजूद रहे।
रिपोर्ट- देवेन्द्र कोरी




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